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15 दिन के ह्रदय रोगी बच्चे को मिला नया जीवन


डॉ. महेरे ने एक अत्यंत ही रेयर बीमारी को 15 दिन के बच्चे में डायग्नोसिस कर उसे ऑपरेशन द्वारा नया जीवन प्रदान किया | इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर के 15 दिन के बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होने पर उसे डॉ. महेरे को दिखाया गया, डॉ. महेरे ने बच्चे का इको कलर डोप्लर कर बताया कि बच्चा बहुत ही खतरनाक तथा रेयर जन्मजात ह्रदय रोग कि बीमारी से पीड़ित है, इसे मेडिकल शब्दों में ट्रांसपोसीशन ऑफ़ ग्रेट आर्टरी कहते हैं |


नागपुर के मरीज का जबलपुर में सफल उपचार


नगर के प्रतिष्ठित ह्रदय रोग विशेषग्य डॉ. महेरे नेपियर टाउन द्वारा नागपुर कि गर्भवती महिला का नगर में सफलता पूर्वक इलाज कर लाभान्वित किया| विशेष बात यह है, कि यह मरीज गर्भवती थी तथा उसका बच्चा पेट में ही ख़त्म हो गया, मरीज ने अपना इलाज नागपुर के प्राइवेट तथा सरकारी अस्पताल में कराया|बहुत सारी जांचे कराने के बाद भी उसकी बीमारी पकड़ में नहीं आई फिर उसे जबलपुर में डॉ. महेरे को दिखाया गया, डॉ. महेरे ने इको तथा जांच कर बताया कि मरीज का हार्ट गुब्बारे कि तरह फूल कर अत्यधिक कमजोर हो गया है, इलाज शुरू करने पर तुरंत फायदा हुआ, परन्तु डॉ. महेरे यहीं पर नहीं रुके तथा उन्होंने इस बीमारी का कारण जानने के लिए सीरम कैल्शियम कि जांच करायी जो अत्यधिक कम निकला|इस बीमारी को मेडिकल भाषा में हैपोकेल्सिमिक डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी कहते हैं| मरीज को कैल्शियम तथा अन्य दवाई देने पर उसका हार्ट लगभग नार्मल हो गया तथा मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है|


चार बच्चे गंवाने के बाद माँ बनी


डॉ. अतुल महेरे (हार्ट रोग विशेषग्य ),नेपिअर टाउन के सटीक डायग्नोसिस तथा इलाज के द्वारा एक और गर्भवती महिला तथा उसके बच्चे की जान बचाई जा सकी|शेहडोल निवासी 30 साल की महिला की शादी 7 साल पहले हुई थी ,इस दोरान वह पांच बार गर्भवती हुई परन्तु हर बार उसका बी. पी. बढ़ता था , तथा बच्चा पेट में ही मर जाता था ,जबलपुर समेत कई शहेरो में इलाज के बाद भी यह सिलसिला जारी रहा,अंततः पांचवी बार पुन्हा गर्भवती होने पर उसे डॉ. अतुल महेरे को दिखाया गया | डॉ. मेहेरे ने मरीज की जांच तथा इको कलर डोप्लर कर बताया कि मरीज के पेट में नसों का बहुत बड़ा गोला है , जो कभी भी फट सकता है, इसे मेडिकल भाषा में (abdominal aortic aneurysm) कहते हैं | मरीज का नारायणह्रदयालय बेंगलोर में तुरंत ऑपरेशन किया गया . ऑपरेशन के बाद महिला का बी. पी. पुर्णतः सामान्य हो गया और उसने कुछ महीनों बाद एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया| महिला के परिजनों ने डॉ. अतुल महेरे के प्रति अपना आभार व्यक्त किया|


फेफड़े कि नली में था खून का गोला


डॉ. अतुल महेरे नेपियर टाउन, जबलपुर ने एक व्यक्ति की नली में खून के गोले कि जांच द्वारा पता लगाया तथा ऑपरेशन द्वारा मरीज की जान बचाई | सदर निवासी किशोर को अचानक सांस लेने में तकलीफ होने पर डॉ. को दिखाया गया | कुछ दिन बाद दमा का इलाज लेने के बाद उसके परिजन उसे डॉ. स्वामी के पास ले कर गए,उनहोंने बीमारी की गंभीरता को समझते हुए | उसे डॉ. महेरे के पास जांच के लिए भेजा, डॉ. महेरे ने इको एवं कलर डोप्लर जांच कर बताया कि मरीज के फेफड़े की नली में खून का गोला जम गया है , एवं फेफड़े को ठीक से खून नहीं मिल रहा है, तथा फेफड़े कि नली का बी. पी. भी तीन गुना बढ़ गया है, इस बीमारी को मेडिकल भाषा में पल्मोनरी थ्रोम्बो इम्बोलिस्म कहेते हैं| यह बहुत ही खतरनाक, रेयर तथा जानलेवा बीमारी है| डॉ. महेरे ने मरीज को तुरंत ऑपरेशन कि सलाह दी| मरीज के परिजन मरीज को लेकर हायर सेंटर गए तथा ऑपरेशन कराके खून का गोला निकलवाया| ऑपरेशन के बाद अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ है| इस बीमारी का इतना बढ़ जाने के बाद मृत्यु दर लगभग 100 प्रतिशत होती है|परन्तु डॉ. महेरे द्वारा सही समय पर सटीक डायग्नोसिस कि वजह से मरीज को बचाया जा सका|